Whispering activity
### **बेहतर हियरिंग डेवलपमेंट के लिए एक जबरदस्त एक्टिविटी – विस्परिंग टेक्नीक**
#### **क्या आपके बच्चे का हियरिंग सेंस पूरी तरह विकसित हो रहा है?**
आजकल शोर-शराबे (Noise Pollution) और लगातार ऊंची आवाज़ में सुनने की आदत के कारण कई बच्चों में हियरिंग डिफिशिएंसी (Hearing Deficiency) विकसित हो रही है। वे धीमे और नर्म स्वर नहीं सुन पाते, जिससे उनकी सुनने और समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
### **बच्चों की हियरिंग पावर कैसे बढ़ाएं?**
शोध बताते हैं कि बच्चे ऐसी ध्वनियों को भी सुन सकते हैं, जिन्हें व्यस्क नहीं पकड़ सकते। इसलिए हमें बच्चों से विभिन्न टोन (Tone), पिच (Pitch), और मोड (Mode) में बात करनी चाहिए। इससे उनकी हियरिंग क्षमता को ट्रेन करने में मदद मिलती है।
आज हम **विस्परिंग टेक्नीक** सीखेंगे, जो बच्चों की हियरिंग स्किल्स, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मस्तिष्क के विकास में सहायक होती है।
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### **विस्परिंग टेक्नीक क्या है?**
इस तकनीक में हम बच्चे से **धीरे और फुसफुसाहट (Whispering) में** बात करते हैं, जिससे उसे ध्वनियों को अधिक ध्यान से सुनने की आदत पड़ती है।
### **कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप गाइड)**
1. **फेमस पोएम चुनें:** कोई भी सरल कविता चुनें, जैसे *Twinkle Twinkle Little Star*।
2. **पहले नॉर्मल टोन में पढ़ें:**
- *"Twinkle Twinkle Little Star, How I Wonder What You Are"*
3. **अब फुसफुसाहट में पढ़ें:**
- धीरे-धीरे और हल्की आवाज़ में वही पंक्तियाँ दोहराएँ।
4. **बच्चे की प्रतिक्रिया देखें:** जब आप फुसफुसाहट में बात करेंगे, तो बच्चा बहुत ध्यान से सुनने लगेगा, जिससे उसकी कंसंट्रेशन बढ़ेगी।
### **वैज्ञानिक दृष्टिकोण और शोध**
- **हियरिंग न्यूरोप्लास्टी:** न्यूरोसाइंस रिसर्च (Harvard Medical School, 2019) के अनुसार, जब हम कानों को अलग-अलग टोन में सुनने की ट्रेनिंग देते हैं, तो दिमाग़ के न्यूरल कनेक्शंस मजबूत होते हैं, जिससे ऑडिटरी प्रोसेसिंग स्किल्स बेहतर होती हैं।
- **साउंड फोकसिंग:** नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) के शोध बताते हैं कि विस्परिंग जैसी एक्टिविटीज़ से बच्चों में साउंड फ़िल्टरिंग और फोकसिंग एबिलिटी बेहतर होती है, जिससे वे बैकग्राउंड नॉइज़ को इग्नोर कर पाते हैं।
- **ब्रेन स्टिमुलेशन:** *Journal of Child Psychology and Psychiatry* (2021) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, धीमी आवाज़ पर ध्यान देने से बच्चे का **फोकस, अटेंशन स्पैन और संज्ञानात्मक विकास** में सुधार होता है।
- **सेंसरी न्यूरोडेवलपमेंट:** विस्परिंग टोन सुनने से बच्चों में *सेंसरी इंटीग्रेशन* बेहतर होती है, जिससे वे भविष्य में मल्टी-टास्किंग और निर्णय लेने में अधिक सक्षम होते हैं।
- **अर्ली चाइल्डहुड न्यूरोडेवलपमेंट:** *Yale Child Study Center* के अनुसार, बचपन में विभिन्न टोन में ध्वनियाँ सुनने से बच्चे के ब्रेन का **ऑडिटरी कॉर्टेक्स** अधिक एक्टिव होता है, जिससे उनकी भाषा और संज्ञानात्मक क्षमताओं में तेजी से सुधार होता है।
- **मेमोरी और भाषा कौशल:** विस्परिंग तकनीक से बच्चों की वर्बल वर्किंग मेमोरी बेहतर होती है, जिससे वे शब्दों और ध्वनियों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रोसेस कर सकते हैं।
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### **क्यों ज़रूरी है यह एक्टिविटी?**
✅ बच्चे धीमी आवाज़ों को पहचानना सीखते हैं।\
✅ उनकी सुनने और समझने की क्षमता बेहतर होती है।\
✅ फोकस और कंसंट्रेशन बढ़ता है।\
✅ ब्रेन स्टिमुलेशन होता है, जिससे IQ लेवल भी सुधरता है।\
✅ रोज़मर्रा की बातचीत में वे ध्वनियों के छोटे अंतर को भी समझने लगते हैं।\
✅ विस्परिंग से **स्ट्रेस लेवल कम होता है** और बच्चे अधिक शांत महसूस करते हैं।
✅ यह तकनीक **स्पीच थेरेपी** में भी कारगर साबित होती है, खासतौर पर उन बच्चों के लिए जिन्हें स्पीच डिले की समस्या होती है।
### **कब और कैसे करें?**
- इस एक्टिविटी को **0-3 साल के बच्चों के साथ किया जा सकता है।**
- **डिस्ट्रैक्शन-फ्री माहौल** बनाएं।
- बच्चे को एक्टिविटी के दौरान पूरी तरह से **आरामदायक और खुश** महसूस कराएं।
- एक्टिविटी का टाइम **5-10 मिनट** ही रखें।
- बच्चे को नियमित रूप से **नई पिच और टोन** में सुनने की ट्रेनिंग दें।
- रात को सोने से पहले इस एक्टिविटी को करने से **स्लीप क्वालिटी** भी बेहतर होती है।
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